Add To collaction

कौन रहबर इसका पता तो चले।

कौन रहबर है इसका पता तो चले। 

मैं अगर थक गया काफिला तो चले। 

 ❤️ 

हम चिराग़ों को जलने का आए हुनर। 

सामने से मुखालिफ हवा तो चले। 

❤️

किस लिए हो खफा,किस लिए गमज़दा। 

मेरी गुस्ताखियां कुछ पता तो चले।

❤️ 

हां इफाका न होगा मेरे मर्ज़ में। 

चारागर मेरे,मेरी दवा तो चले। 

❤️

 बात शुरुआत हो, इक मुलाकात की।

 पास बैठो मेरे सिलसिला तो चले। 

❤️

 न "सगी़र"अब ज़माने की परवाह हो। 

दूरियां जितनी हैं सब मिटा तो चले।

शायर 

डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी 

 खैरा बाजार बहराइच

   1
0 Comments